
“झालमुड़ी”
डरता हूँ मैं तेरी एक नज़र मेरी और उठ जाने से,
या तो ये मुझे घायल करेंगी या कत्लेआम करेगी,
तू गलत है ये जान कर भी तुझे कुछ कहना नहीं चाहती,
तुझे ये प्यार लगता है पर वो तुझसे लड़ना नहीं चाहती,
सबकी मदद करना तुझे अच्छा लगता है,
पर घुस्से में फूली नाक में तू मेरा बाबू मेरा बच्चा लगता हैं,
माना तेरे घुस्से के आगे किसी की नहीं चलती,
पर हम भी तो ढीट हैं हमारे आगे प्यार के सिवा किसी के बाप की नहीं चलती,
खाने का तेरा ये शोख़ लोगो से तुझे मोटी कहलवाता हैं,
पर तू भी क्या करे तेरा मन इसके बिना चल भी कहाँ पता हैं,
पता नहीं कैसे ये बदलाव आ रहा है तुझमे,
पहले जो घुस्सा था अब कही खो जा रहा है तुझमे,
हाँ जानता हूँ की कितना कुछ करती हो तुम परिवार चलाने को,
ना जाने क्यों चले आते हैं लोग तुझपे अधिकार जमाने को,
चल तुझे देख कर ये गाना करता हूँ अदा,
के रूठना मनाना ये प्यार की अदा, हैं प्यार की अदा।
#विजय सिंह यादव