वो पल बहुत याद आते हैं

#वो पल बहुत याद आते हैं…

वो पल बहुत याद आते हैं,
जब हम किसी अपने को घर छोड़ जाते हैं,

ये ज़रूरी नहीं की अपने से मतलब किसी सगे से ही हो,
कई अपने पराये भी बन जाते हैं,

अब मुझे ही देखो मेरे परिवार तो मेरा अपना हें ही,
पर न जाने मेरे दोस्त कब मेरे अपने बन जाते हैं,

यारो दोस्तों के साथ बिताया हर वो पल जो ज़िन्दगी भर याद आते हैं,
चाह कर भी कभी न दिलो दिमाग से जा पाते हैं,

इस नई यूवा पीढ़ी को न जाने कोनसी लात लगी हैं सिगरेट और दारू की,
शर्ते रखने पर भी इसे न अब छोड़ पते हैं,

ज़माने को ये लगता है कि ये तो सिगरेट और दारू के नशे में चूर हो जाते हैं,
पर ज़माने की इस सोच को ये अपने जूते तले दबाते हैं,

भविष्य को लेकर उठे मन में जो सवाल या मानसिक तनाव होते हैं,
न जाने कैसे किसी अपने के साथ बैठकर उसे बताने की बजाये कैसे अपने दिल में दफ़न कर जाते हैं,

कुछ अपने तो कहते हैं मेने लिखा हुआ है तेरा भविष्य,
ये बात बताकर वो बस इतना बताना चाहते है कि तुम्हे इतना चाहते है इतना चाहते है कि हनुमान जी की तरह सीना चीर के दिखाये की कितना चाहते है,

चलो कविता से शुरू हुई इस रेल गाड़ी की इस फ़िल्मी डायलॉग से वापस कविता पर लाते हैं,

वो पल बहुत याद आते है,
जब हम किसी अपने को घर छोड़ जाते हैं।

#विजय सिंह यादव

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