“मजदूर”

“मजदूर”

हे भइया ई मजदूर कौन होत हैं?

मजदूर वो होत हे जिसकी ये ऊंची औकात वाला ज़माना कौनों इज्ज़त नाही करता हैं,

मजदूर वो होत हे जो अपने दम पर बड़ी बड़ी ईमारत खड़ी कर देत हैं,

मजदूर वो होत हे जिसका पेट्रोल उसकी खैनी, बीड़ी और थोड़ा कत्था और ज़्यादा चूना वाला पान होता  हैं,

मजदूर वो होत हे जो इन इज्ज़तदार लोगो के रहने के लिये आलीशान बंगला बनाते है,

मजदूर वो होत हे जो हांथो में दर्जनों छालो के साथ काम  करता रहता हैं,

मजदूर वो होत हे जो दुसरो के लिए बड़ी बड़ी ईमारत बनाता हैं पर खुद टीन टप्पर की झौपड़ी में सो जाते हैं,

मजदूर वो होत हे जो इन इज्ज़तदार लोगो के लिए सड़क, पुल, आदि का निर्माण करते हैं,

मजदूर वो होत हे जो उन नालियों की सफ़ाई करते हैं जिसमे साँस लेना तक मुश्किल होता है,

मजदूर वो होत हे जो उन बड़े घर की बड़ी औकात वाली महिला को तरह नहीं कहता “भइया इयू कितनी बदबू आ रही हैं,

मजदूर वो होत हे जिसने ताज महल को बनाया और अपने हांथो की बली देकर उसको विश्वप्रसिद्ध कराया हैं,

मजदूर वो होत हे जिसने मालिको के लिए लाखों का माल बनाया है और उसके खुदके हाँथ में पाँच सौ रूपया आया हैं,

मजदूर वो होत हे जो खेतो में काम करके पूरी दुनिया को खिलाता हैं वो अलग बात है कि खुदके परिवार के लिए दो रोटी को तरस जाता हैं,

मजदूर देश की रीढ़ माना जाता है इसकी इज्जत करो यही सबका जीवन चलता हैं।

#विजय सिंह यादव

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