महावीर अभिमन्यु

“महावीर अभिमन्यु”

कृष्ण का शिष्य, भीष्म के पौत्र अर्जुन का हैं पुत्र हैं अभिमन्यु,

जिसने सुभद्रा के गर्भ में सीखा चक्रव्यूह को तोड़कर घुसना तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने किया जीवन का पहला युद्ध भीष्म से और काटे बाण भीष्म के तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने रोका रास्ता भीष्म का तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने छोड़ा दुर्योधन को न किया वध भीम का शिकार बता कर तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने किया युधिष्ठिर की चिंता को दूर तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने भेदा अकेले गुरु द्रोण के चक्रव्यूह को तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने केवल चक्रव्यूह में घुसने का रास्ता जाना पर फिर भी चक्रव्यूह में गया तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने अकेले चक्रव्यूह के अंदर मारे योद्धा कभी तीर से काटे कभी तलवार से तू को वीर अभिमन्यु,

चक्रव्यूह के मध्य में अडग खड़ा जो रहा तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने चक्रव्यूह में भेदा द्रोण, मद्र नरेश, कुल गुरु, कर्ण, अश्वथामा जैसे महारथियों की छाती को तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने किया लहुलुहान मामा शकुनी, दोनों ताऊ दुशासन और दुर्योधन को तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने न त्यागी युद्ध करने की अभिलाषा होने के बाद रथहीन कर्ण के निर्दयी बाण से तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने बोला हूँ में शिष्य वासुदेव श्री कृष्ण का मानूँगा न हार लडूँगा सभी महारथियों से अकेला तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने उठाया पहिया रथ का और युद्ध किया कौरव सेना से तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसका लगा लहु नंघी तलवारों पर जिसका किया क़त्ल सात-सात ने मिलकर तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने पुकारा अपने पिता को धरा पर पड़े हुए अधमरा बोला पूछना यहाँ की भूमी से कैसे लड़ा इन सभी कायर योद्धाओं से तू वो वीर अभिमन्यु,

जिसने मरते मरते बोला ये मेरा दुर्भाग्य है कि में तुम जैसे कायरों के हाँथो को वीर गति को प्राप्त हो रहा हूँ तू वो वीर अभिमन्यु,

तब देख कर ये दुखदायी मंज़र सभी गुरुओं की आँखे भर आती है,
चहरे से नहीं दिखाते पर आत्मा रो जाती हैं।

#विजय सिंह यादव

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