
एक लाचार थका हारा मजदूर पूछता है सड़को से सवाल की जब मैने ;
तुम्हे इतनी मेहनत से बनाया,
तुम्हे अपने इन छाले भरे हाँथों से बनाया,
तुमसे अपने बच्चे की तरह प्यार जताया,
तुममें अपना खून पसीना तक लगाया,
खुद रोटी दो पल देरी से खायी,
पर तेरा ख्याल भरपूर रखा,
तुम्हे बचा हुआ ढाई घूट पानी तक पिलाया,
तब क्यों???
तब क्यों तुम इस गर्म तप्ती भट्टी में मुझे नीचे से झुलसा रहे हों?
तब क्यों तुम मेरे पाव पर छालों का एक जल बिछा देते हो?
तब क्यों तुम मुझे मेरे घर तक बिना दर्द दिए नहीं पहुँचाते हो?
तब क्यों तुम मेरा मृत शरीर अपने ऊपर रख रहे हो?
तब क्यों तुम मुझे ख़ुदको मेरे इन नंगे पाँवो से नापने नहीं दे रहे हो?
तब क्यों तुम मेरे सवालो का जवाब नहीं दे रहे हो?
क्या मेरा तुम पर इतना भी
हक़ नहीं रह गया है???
#विजय सिंह यादव