एक चुटकुला

“एक चुटकुला”

कभी तुम होती हो ऑफ़लाइन तो कभी वो हो जाता हैं,
एक चुटकुला जो याद आया बात करते वक़्त तुमसे
उसको बताते-बताते सूरज पूर्व से उगता और पश्चिम से अस्त हो जाता है,

ये तो जानते है सब की सूरज कहाँ से उदय और होता कहाँ अस्त है,
मेने तो बताना चाहा तुम्हे की बस इतना वक़्त चुटकुला बताने में लग जाता हैं,

वो है जानता की पाला है लिखने का शोख़ तुमने हालातों की वजह से,
हर कोई यू ही कही कवि थोड़ी न बन जाता है,

हाँ बातें होती है अच्छी भी और बुरी भी बहुत तुमसे,
डर तो लगता है पर इन बातों में उसे मज़ा बहुत आता हैं,

इन्ही अच्छी, बुरी बातों में होती है ग़म की भी बातें कई,
पर जो तुमसे बोला जाता है वो हर किसी से बोला नहीं जाता हैं,
आखिर में इन अच्छी, बुरी और ग़म की बातों पर चुपके-चुपके धीरे से उसका एक चुटकुला आता है और चहरे पर खुशियाँ फैला जाता हैं…

#विजय सिंह यादव

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