
ये कोरोना क्या क्या दिन दिखायेगा,
किसको पता था रामायण इतना देखा जायेगा की वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए दुनिया में सबसे ज़्यादा देखा जाने वाला धारावाहिक बन जायेगा,
किसी परिवार को शक भी नहीं था उनको फिर से रामायण के ज़रिये जोड़ा जाएगा,
सरकार ने करे बच्चों के सपने सच स्कूल को किया बंद तो सुनी बड़ो की भी बात “वर्क फ्रॉम होम” का आदेश लाये जिससे सबको घर पर ही रोका जायेगा,
सोचा नहीं था उसने जिसने कभी ज़िन्दगी में कुछ बनाया नहीं था खाने को की वो भी रसोई में बावर्ची बन जायेगा,
मिला करते थे जो चाय की टपरी पर रोज़ शाम को अब लॉक-डाउन में घर में कैद वीडियो कॉलिंग उनको मिलायेगा,
आया फ़रमान सरकार का हुए खुश मजदूर लगा तो सबको की बैठे बैठे उनको उनकी दिहाड़ी को दिया जायेगा,
सोचा किसी ने नहीं था अगर न मिली दिहाड़ी तो कैसे मजदूर का पेट पाला जायेगा सोचा नहीं था किसी ने की कैसे घर का किराया दिया जायेगा,
आंका सब ने मजदूर को कम सोचा ये कहाँ दिल्ली से यूपी बिहार बिना साधन के जा पायेगा,
हुआ न ऐसा कुछ फिर भी भनक नहीं लगी की ये मजदूर है नंघे पांव अपने घर पैदल ही चलता चला जायेगा,
किसने सोचा था कोरोना कभी इंसानो को भी कुत्ते की तरह मुह पर मास्क की एक बंदिश तो कभी मजदूरों को मीलों मील तप्ती सड़को पर चलवायेगा,
जानवर भी हुए होंगे खुश जब पता लगा होगा की अब उनको कैद करने वालो को खुद कैद में रखा जायेगा,
पर एक बात तो तय है जब जब कोरोना काल को याद किया जायेगा तब तब डॉक्टर, पुलिस, सफाई कर्मियों, और बाकि कोरोना योद्धाओं का नाम सबसे पहले लिए जायेगा,
ये इंसानो से बंदर जैसा नाच करवाएगा,
ये कोरोना है साहब अभी तो और रुलायेगा…
#विजय सिंह यादव