हुआ बड़े दिनों के बाद पर अच्छा हुआ…

हुआ बड़े दिनों के बाद पर अच्छा हैं,

ये नीला आसमान बटा हुआ है तीन रंग में,
डरावने काले, शांत सफ़ेद और केसरी रंग में,

धरती के एक छोर से निकलता हुआ इंद्रधनुष भी दिखता है अपने सातों रंग में,

उड़ते तोते का झुंड बताता है
की जीवन कितना रंगीन है इस ढंग में,

घनघोर काली घटाओ को चीरती हुई बिजलिया
बताती हैं की कोई रोक नहीं सकता हमको इस ढंग में,

वो बचपन की यादें ताज़ा करती है शगुन जो खेलती हैं इस मौसम में अंडे वाली बॉल से अपने रंग में,

इन खतरनाक हवाओ से जूझती हुई दिखती है रंग बिरंगी पतंगे रंग बिरंगे गगन में,

लो बस अब खत्म हुआ इंतज़ार अब शुरू हुई वर्षा भी अपने मद्धम मद्धम रंग में,

आने लगी वो खुशबू जो उठे बदलो की बूंदों और धरती की मिटटी के संग में,

हुई थोड़ी सी वर्षा और वातावरण कर गयी साफ़ अपने रंग में…

हुआ बड़े दिनों के बाद पर अच्छा हैं।

#विजय सिंह यादव

संगीत

संगीत जोड़ कर रख देता है दिल से दिमाग तक सारे तार,
संगीत ही है ऐसी कला जो ले जाये दुखो और ग़मो के उस पार…

जहाँ ख़ुशी बस्ती है, जहाँ एक अलग सी ही दुनिया दिखती है,
सारी कुदरत की सुंदरता अलग से बिखरने लगती हैं,
वो चाहे ढलते हुए सूरज की लालिमा हों,
या हरी भरी कुदरत की छाती हों,
वो चाहे मानव निर्मित सार सुथरी सड़क हो…

संगीत की धुन में खो देते है अपनी सुद-बुद कई लोग,
उनके लिए संगीत ही हैं उनको रखने के लिए निरोग,
शांत और धीमा संगीत में बड़ा अच्छा लगता है योग,
तो धीमे संगीत के साथ करो योग और रहो निरोग,

संगीत है ही ऐसी चीज़ जिसे सुनने के बाद,
अलग सा आत्मविश्वास आता हैं,
चहरे पर अलग सा निखार छा जाता हैं,
किसी और का पता नहीं पर मेरा दिल इसमें डूबना चाहता है।

#विजय सिंह यादव

सवेरा

सवेरा
इन खूबसूरत सुबहों से रिश्ता कोई जाना पहचाना कुछ पुराना सा लगता है,

पहले न हुआ करती थी इतनी खूबसूरत पर आजकल तो फिर से जैसे छेड़ा कोई गुज़ारा तराना लगता है,


आज़ाद पक्षियों की सुरीली आवाज़ और उनकी टोली बिखेरती दिखती है नीले गगन में सकारात्मकता और रंगोली,


हर पेड़ से कोई न कोई सुरीली आवाज़ आती है और ये एहसास कराती है कि जैसे यहाँ भी जीवन हो,

सुन्दर सुन्दर हल्की हल्की हवा के झोंके कानों में ठंडी ठंडी आवाज़ करते निकलते हैं मानों सुप्रभात बोल रहे हों,


और अब आसमान में हल्की हल्की लालीमा होने लगती है इस हल्की अंधेरी सुबह में इंसानो की भी ज़िन्दगी उजाले से जगमगाने लगती हैं,

पेड़ो को चीरती सूरज की किरण दिखती है,


ये जो छतों पर दौड़ते लोग दीखते हैं,

किसी पिंजरे में कैद जानवर से लगते हैं,


नई सुबह, नया सवेरा, महकेगा फूलो की खुशबू से घर सबका तेरा हो या मेरा।


#विजय सिंह यादव